Course Content
On Equality Chapter 1 in Hindi & English
On Equality - Civics Social Science Chapter 1 in Hindi & English
0/4
A Shirt in the Market – Chapter 8 Hindi & English
A Shirt in the Market - Chapter 8 Hindi & English
0/3
Class 7 Political Science Hindi (Civics)
About Lesson

1. ‘मताधिकार की ताकत’ से आप क्या समझते हैं? इस पर आपस में विचार कीजिए। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-115)
उत्तर : भारत के संविधान में भारत के सभी नागरिकों को जो वयस्क हैं या 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के हैं, उन्हें एक गुप्त मत देने का अधिकार है। भारत के प्रत्येक नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग करके अपने प्रतिनिधि का चुनाव करते हैं और कई चुने हुए प्रतिनिधि मिलकर ही सरकार का गठन करते हैं। नागरिकों के मताधिकार के कारण ही भारतीय लोकतंत्र की सर्वोच्च शक्ति जनता में निहित है।

2. क्या आप अपने परिवार, समुदाय, गाँव या शहर में किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोच सकते हैं, जिनका आप इसलिए सम्मान करते हैं, क्योंकि उन्होंने न्याय और समानता के लिए लड़ाई लड़ी? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-116)
उत्तर : हम अपने गाँव के ग्राम प्रधान उदय नारायण सिंह के बारे में जानते हैं। जो शिवनगर ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान के साथ-साथ एक समाज सेवी भी हैं। कई बार ग्राम पंचायत में एक जाति के लोग दूसरे जाति के साथ अन्याय और असमानता का व्यवहार करते थे तो वे अन्याय करने वाले व्यक्ति को समझाते थे। लोग उनका सम्मान करते हैं, इसलिए उनकी बातों को जल्द मान लेते हैं। इस तरह से उनके प्रयास के कारण ग्राम पंचायत के लोगों में सौहार्द का वातावरण उत्पन्न हुआ है।

3. ‘तवा मत्स्य संघ’ के संघर्ष का मुद्दा क्या था? ( एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-118)
उत्तर : तवा मत्स्य संघ के संघर्ष का मुद्दा : संघ ने सरकार से माँग की कि लोगों के जीवन-निर्वाह के लिए बाँध में मछलियाँ पकड़ने के काम को जारी रखने की अनुमति दी जाए, जो कि 1994 से तवा बाँध के क्षेत्र में मछली पकड़ने का काम निजी ठेकेदारों को सौंप दिया गया था।

4. गाँव वालों ने यह संगठन बनाने की जरूरत क्यों महसूस की? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-118)
उत्तर : 1994 में सरकार ने तवा बाँध के क्षेत्र में मछली पकड़ने का काम निजी ठेकेदारों को सौंप दिया। इन ठेकेदारों ने स्थानीय लोगों को काम से अलग कर दिया और बाहरी क्षेत्र से सस्ते श्रमिकों को ले आए। ठेकेदारों ने गुंडे बुलाकर गाँव वालों को धमकियाँ देना भी आरंभ कर दिया, क्योंकि लोग वहाँ से हटने को तैयार नहीं थे। गाँव वालों ने एकजुट होकर तय किया कि अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ने और संगठन बनाकर सामने खड़े होने का वक्त आ गया है। इस तरह ‘तवा मत्स्य संघ’ नाम के संगठन को बनाया गया।

5. क्या आप सोचते हैं कि ‘तवा मत्स्य संघ’ की सफलता का कारण था, ग्रामीणों की बड़ी संख्या में भागीदारी? इस संबंध में दो पंक्तियाँ लिखिए। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-118)
उत्तर : यह बात सही है कि ‘तवा मत्स्य संघ’ की सफलता का कारण था, ग्रामीणों की बड़ी संख्या में भागीदारी। ग्रामीणों ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए एकजुटता का परिचय दिया। ग्रामीण लोगों ने चक्का जाम अभियान शुरू किया। उनके प्रतिरोध को देखकर सरकार ने पूरे मामले की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की। । समिति ने गाँव वालों के जीवनयापन के लिए उनको मछली पकड़ने का अधिकार देने की अनुशंसा की।

6. समानता के लिए लोगों के संघर्ष में हमारे संविधान की क्या भूमिका हो सकती है? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-121)
उत्तर : संविधान भी भारत के सभी नागरिकों को एक समान मानता है। संविधान जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र, लिंग के आधार पर किसी से भेदभाव नहीं करता। इसलिए तब लोग समानता के लिए संघर्ष करते हैं, संवैधानिक कानून उनके पक्ष में होता है। जब भी समानता के लिए संघर्ष का मामला न्यायालय में जाता है। न्यायालय संविधान को ध्यान में रखते हुए फैसला संघर्ष करने वालों के पक्ष में देता है। इसलिए समानता के लिए लोगों के संघर्ष में संविधान की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।

1. आपके विचार से समानता के बारे में शंका करने के लिए कांता के पास क्या पर्याप्त कारण हैं? उपरोक्त कहानी के आधार पर उसके ऐसा सोचने के तीन कारण बताइए। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-6)
उत्तर : कांता के समानता के बारे में शंका करने के तीन कारण

 
  1. कांता एक झोपड़पट्टी में रहती है और उसके घर के पीछे एक नाला है। यह एक आर्थिक विषमता | का सूचक है।
  2. उसे अपने काम में एक भी छुट्टी नहीं मिलती जबकि निगमित उद्यम में काम करने वाले लोगों को कई-कई छुट्टियाँ मिलती हैं।
  3. उसे अपने बच्चों का इलाज कराने के लिए सरकारी अस्पताल में लंबी लाइन लगानी पड़ती है। जबकि सम्पन्न लोग निजी अस्पतालों में अपने बच्चों का इलाज कराते हैं जिसमें उन्हें लंबी लाइन नहीं लगानी पड़ती है।

2. आपके विचार से ओमप्रकाश वाल्मीकि के साथ उसके शिक्षक और सहपाठियों ने असमानता का व्यवहार क्यों किया था? अपने-आपको ओमप्रकाश वाल्मीकि की जगह रखते हुए चार पंक्तियाँ लिखिए कि उक्त स्थिति में आप कैसा अनुभव करते? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-8)
उत्तर: हमारे समाज में सामाजिक असमानता और आर्थिक असमानता कायम है। सामाजिक असमानता के तहत जातीय आधार पर भेदभाव किए जाते हैं। इसी आधार पर ओमप्रकाश बाल्मीकि के साथ उसके शिक्षक और सहपाठी ने असमानता का व्यवहार किया।

अगर हम ओमप्रकाश वाल्मीकि की जगह होते तो हमें निम्न तरह का अनुभव होता

  1. सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ असंतोष पैदा होता।
  2. जातीय आधार पर भेदभाव को भी गलत मानते।
  3. अपने आपको सम्मानित महसूस नहीं करते।
  4. हमारे मन में कुंठा और ग्लानि उत्पन्न होती।

3. आपके विचार से अंसारी दंपति के साथ असमानता का व्यवहार क्यों किया जा रहा था? यदि आप अंसारी दंपति की जगह होते और आपको रहने के लिए इस कारण जगह न मिलती क्योंकि कुछ पड़ोसी आपके धर्म के कारण आपके पास नहीं रहना चाहते, तो आप क्या करते? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-8)
उत्तर: हमारे देश में कई तरह की विविधता है। इन विविधताओं में जाति, भाषा, धर्म, लिंग, क्षेत्र और संस्कृति प्रमुख है। इन विविधताओं के कारण देश में कुछ लोग एक-दूसरे से भेदभाव करते हैं। इस भेदभाव का मुख्य कारण संकीर्ण मानसिकता और शिक्षा का अभाव है। यदि हम अंसारी दंपति की जगह होते और हमें रहने के लिए इस कारण जगह नहीं मिलती, क्योंकि कुछ पड़ोसी हमारे धर्म के कारण हमारे पास नहीं रहना चाहते हैं तो हम निम्न गतिविधि को करते

  1. अपने पड़ोसी को समझाने का प्रयास करते।
  2. अपने मकान मालिक को उनके अनुकूल रहने का भरोसा दिलाते।
  3. हम अपने अच्छे विचारों को उनके सामने रखते।

4. यदि आप अंसारी परिवार के एक सदस्य होते, तो प्रॉपर्टी डीलर के नाम बदलने के सुझाव का उत्तर किस प्रकार देते? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-9)
उत्तर: यदि हम अंसारी परिवार के एक सदस्य होते तो प्रॉपर्टी डीलर के नाम बदलने के सुझाव का उत्तर निम्न प्रकार से देते

  1. प्रॉपर्टी डीलर को यह बतलाते कि हम अपना नाम बदल सकते हैं, लेकिन मिलने वाले रिश्तेदारों का नाम कैसे बदलेंगे।
  2. नाम बदलने के बाद अपने मजहब के पर्व त्यौहार, नमाज पढ़ना और रीति-रिवाजों को कैसे छोड़ सकते हैं।
  3. नाम बदलने से हमेशा जो मन में डर बना रहेगा कि कहीं मकान मालिक और पड़ोसी को हमारे धर्म
    के बारे में पता न चल जाए।

5. क्या आपको अपने जीवन की कोई ऐसी घटना याद है, जब आपकी गरिमा को चोट पहुँची हो? आपको उस समय कैसा महसूस हुआ था? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-9)
उत्तर :भारत में कई आधारों पर लोगों की गरिमा को चोट पहुँचाई जाती है। दिल्ली जैसे शहर में पूर्वांचल से (बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड) आने वाले लोगों को बिहारी कहकर संबोधित किया जाता है। यह संबोधन व्यंग्य का प्रतीक है। यह शब्द बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड के लोगों के लिए ही संबोधन नहीं किया जाता बल्कि दिल्ली में भी किसी व्यक्ति को अपमानित करना होता है तो उसे बिहारी शब्द से संबोधित करके अपमानित करते हैं। ऐसी स्थिति में मुझे यह महसूस होता है कि भारतीयों में सबसे बड़ी कमी यही है कि वे अपनी कमी को नहीं देखते बल्कि दूसरे की कमी को देखकर व्यंग्य करते हैं। यही कारण है कि हमारे देश के पास पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन हम पिछड़े हुए हैं।

6. मध्याह्न भोजन कार्यक्रम क्या है? क्या आप इस कार्यक्रम के तीन लाभ बता सकते हैं? आपके विचार से यह कार्यक्रम किस प्रकार समानता की भावना बढ़ा सकता है? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-11)
उत्तर : मध्याह्न भोजन कार्यक्रम के अंतर्गत सभी सरकारी प्राथमिक स्कूलों के बच्चों को दोपहर का भोजन स्कूल द्वारा दिया जाता है। यह योजना भारत में सर्वप्रथम तमिलनाडु राज्य में प्रारंभ की गई और 2001 में उच्चतम न्यायालय ने सभी राज्य सरकारों को इसे अपने स्कूलों में छह माह के अंदर आरंभ करने के निर्देश दिए।

मध्याह्न भोजन कार्यक्रम के तीन लाभ

  1. दोपहर का भोजन मिलने के कारण गरीब बच्चों ने अधिक संख्या में स्कूल में प्रवेश लेना और नियमित रूप से स्कूल जाना शुरू कर दिया।
  2. इस कार्यक्रम के पहले बच्चे खाना खाने घर जाते थे और फिर वापस स्कूल लौटते ही नहीं थे, परंतु इस कार्यक्रम के बाद उनकी दोपहर की उपस्थिति में सुधार आया है।
  3. वे माताएँ जिन्हें पहले अपना काम छोड़कर दोपहर को बच्चों को खाना खिलाने के लिए घर पर आना पडता था, अब उन्हें ऐसा नहीं करना पड़ता है।

7. अपने क्षेत्र में लागू की गई किसी एक सरकारी योजना के बारे में पता लगाइए। इस योजना में क्या किया जाता है। यह किसके लाभ के लिए बनाई गई है? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-11)
उत्तर : हमारे क्षेत्र दिल्ली में सरकार द्वारा छात्रों को स्कूल ड्रेस के लिए पैसे दिए जाते हैं। यह रकम कक्षा के अनुसार अलग-अलग दिए जाते हैं। बिहार राज्य में स्कूल ड्रेस के लिए और साइकिल के लिए छात्राओं को पैसे दिए जाते हैं। दिल्ली में लाडली योजना के तहत लड़कियों की शादी के लिए कुछ रकम दी जाती है। इस योजना द्वारा दिए जाने वाली अधिकतम राशि एक लाख रुपये है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार ने भी लड़कियों के लिए योजना लागू की है। इन राज्यों के अतिरिक्त भी कई राज्यों में विभिन्न योजनाएँ लागू की गई हैं।

प्रश्न-अभ्यास
पाठ्यपुस्तक से

1. लोकतंत्र में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार क्यों महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर : लोकतंत्र में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का महत्त्व

  1. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार भारत के सभी नागरिकों को प्राप्त है।
  2. ‘सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का विचार’ समानता के विचार पर आधारित है, क्योंकि यह घोषित करता है कि देश का प्रत्येक वयस्क स्त्री/पुरुष चाहे उसका आर्थिक स्तर या जाति कुछ भी क्यों न हो, एक वोट का हकदार है।
  3. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के माध्यम से भारत का प्रत्येक नागरिक अपने प्रतिनिधियों का चुनाव स्वयं करता है।

2. बॉक्स में दिए गए संविधान के अनुच्छेद 15 के अंश को पुनः पढ़िए और दो ऐसे तरीके बताइए, जिनसे यह अनुच्छेद असमानता को दूर करता है?
उत्तर : अनुच्छेद 15 के द्वारा असमानता को दूर करने के तरीके

  1. राज्य किसी नागरिक के विरुद्ध केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर कोई भेद नहीं करेगा।
  2.  कोई नागरिक केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर किसी व्यक्ति को दुकानों, सार्वजनिक भोजनालयों और सार्वजनिक मनोरंजन के स्थानों में प्रवेश करने से वंचित नहीं कर सकता। पूर्णतः अंशतः राज्य निधि से निर्मित कुँओं, तालाबों, स्नानघाटों, सड़कों और सार्वजनिक समागम के स्थानों के उपयोग पर प्रतिबंध नहीं लगा सकता।

3. ओमप्रकाश वाल्मीकि का अनुभव, अंसारी दंपति के अनुभव से किस प्रकार मिलता था?
उत्तर ओमप्रकाश वाल्मीकि और अंसारी दंपति का अनुभव निम्न रूप से समान था

  1. ओमप्रकाश वाल्मीकि को समाज के अन्य उच्च वर्गों के छात्रों से अलग फर्श पर बैठना पड़ता था और शिक्षकों के द्वारा भी उससे झाड़ लगवाया जाता था, उसी तरह से अंसारी दंपति को भी लोग अपने मकान में कमरा नहीं देना चाहते थे।
  2. ओमप्रकाश वाल्मीकि के साथ असमानता का व्यवहार जातिगत कारणों से किया गया था, जबकि अंसारी दंपति के साथ असमानता का व्यवहार धार्मिक कारणों से किया गया था।

4. “कानून के सामने सब व्यक्ति बराबर हैं”-इस कथन से आप क्या समझते हैं? आपके विचार से यह लोकतंत्र में महत्त्वपूर्ण क्यों है?
उत्तर : कानून के समक्ष सभी व्यक्ति बराबर है इससे तात्पर्य है कि

  1. कानून के समक्ष सभी व्यक्ति समान हैं चाहे वह भारत का सबसे बड़ा पद राष्ट्रपति का हो या एक सामान्य नागरिक। सभी को एक तरह के अपराध के लिए एक ही तरह के दंड देने का प्रावधान है।
  2. कानून किसी भी व्यक्ति के साथ उसके धर्म, जाति, लिंग, वंश, क्षेत्र के आधार पर भेदभाव नहीं करता। कानून के समक्ष भारत के सभी नागरिक एक समान हैं। हमारे विचार से कानून के समक्ष समानता से लोगों में यह संदेश जाता है कि देश में किसी के साथ भेदभाव नहीं हो रहा है और हम कानून के समक्ष सामान्य जनता का भी वही महत्त्व है, जो एक बड़े पद पर बैठे व्यक्ति का। इससे लोकतंत्र काफी मजबूत होता है।

5. भारत सरकार ने 1995 में विकलांगता अधिनियम स्वीकृत किया था। यह कानून कहता है कि विकलांग व्यक्तियों को भी समान अधिकार प्राप्त हैं और समाज में उनकी पूरी भागीदारी संभव बनाना सरकार का दायित्व है। सरकार को उन्हें निःशुल्क शिक्षा देनी है और विकलांग बच्चों को स्कूल की मुख्यधारा में सम्मिलित करना है। कानून यह भी कहता है कि सभी सार्वजनिक स्थल, जैसे-भवन, स्कूल आदि में ढलान बनाए जाने चाहिए, जिससे वहाँ विकलांगों के लिए पहुँचना सरल हो।
NCERT Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 1 (Hindi Medium) 1

चित्र को देखिए और उस बच्चे के बारे में सोचिए, जिसे सीढ़ियों से नीचे लाया जा रहा है। क्या आपको लगता है कि इस स्थिति में विकलांगता का कानून लागू किया जा रहा है? वह भवन में आसानी से आ-जा सके, उसके लिए क्या करना आवश्यक है? उसे उठाकर सीढ़ियों से उतारा जाना, उसके सम्मान और उसकी सुरक्षा को कैसे प्रभावित करता है?
उत्तर :

  1. उपरोक्त चित्र में विकलांगता कानून का पालन नहीं किया जा रहा है, क्योंकि भवन में ढलान नहीं बना हुआ है इसलिए बच्चे को सीढ़ियों के माध्यम से लाया जा रहा है।
  2. विकलांग व्यक्ति के लिए आसानी से भवन में आने-जाने के लिए सीढ़ियों के स्थान पर ढलान का निर्माण किया जाना चाहिए।
  3. उसे सीढ़ियों से उठाकर लाने-ले जाने से उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचती है। वह अपने को अक्षम मानने लगता है, जिससे उसका आत्मबल कमजोर होगा। उसे बार-बार सीढ़ियों से चढ़ाने और उतारने से दुर्घटना हो सकती है जिससे उसे शारीरिक चोट पहुँच सकती है।
Join the conversation
Skip to toolbar